नेपाल में विनाशकारी बाढ़: 1,300 से ज्यादा लोग लापता, सैकड़ों विदेशी नागरिकों की तलाश जारी
काठमांडू: नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने कई इलाकों को प्रभावित किया। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की तलाश कर रहे हैं। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक इस आपदा में 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।
कैसे आई इतनी भयानक बाढ़?
रिपोर्टों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र में एक बड़े ग्लेशियर या बर्फ-पत्थर के ढहने से नदी तंत्र में अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी पहुंचा। इसके बाद तेज रफ्तार फ्लैश फ्लड ने नदी के आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।
शुरुआत में इस घटना को लेकर भूकंप की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद की जांच में संकेत मिले कि दर्ज की गई seismic activity संभवतः ग्लेशियल collapse और उससे जुड़े debris flow की वजह से थी।
सैकड़ों विदेशी नागरिक भी लापता
इस आपदा का सबसे चिंताजनक पहलू बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों का संपर्क से बाहर होना है। नेपाल के पर्यटन अधिकारियों और अन्य रिपोर्टों के अनुसार भारत सहित कई देशों के नागरिक लापता लोगों में शामिल हैं।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में लापता पर्यटकों में भारत के 177 नागरिक शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, यूक्रेन और अन्य देशों के नागरिक भी लापता बताए गए हैं। हालांकि अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर है और बचाव अभियान के दौरान संख्या लगातार बदल सकती है।
यही वजह है कि अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की सही संख्या तय करना और प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचना है।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान तेज
बाढ़ के बाद नेपाल के सुरक्षा बलों और बचाव दलों ने प्रभावित क्षेत्रों में अभियान तेज कर दिया है। हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों की तलाश की जा रही है और दुर्गम इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
कई जगहों पर सड़कें, पुल और दूसरी बुनियादी सुविधाएं बाढ़ और मलबे से प्रभावित हुई हैं। इससे बचाव टीमों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
अधिकारियों को आशंका है कि आने वाले समय में मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव हो सकता है, क्योंकि कई इलाकों में अभी भी खोज और पहचान का काम जारी है।
भारत के नागरिकों को लेकर भी चिंता
नेपाल भारत के लोगों के लिए एक प्रमुख पर्यटन और धार्मिक गंतव्य है। इसलिए इस आपदा में भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है।
रिपोर्टों में भारतीय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। भारतीय अधिकारियों की ओर से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों की सहायता के लिए संपर्क व्यवस्था उपलब्ध कराने की खबर भी सामने आई है।
हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता प्राकृतिक खतरा
नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को भी सामने लाती हैं। ग्लेशियरों और बर्फीली संरचनाओं में बदलाव, भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक नदी के जलस्तर में वृद्धि पहाड़ी इलाकों में गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञों और रिपोर्टों ने भी हिमालय में बदलती जलवायु परिस्थितियों और ग्लेशियल instability को लेकर चिंता जताई है। पिछले वर्ष भी इसी व्यापक क्षेत्र में बाढ़ से नुकसान हुआ था।
अभी भी जारी है तलाश
नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना, लापता लोगों का पता लगाना और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना है।
हालांकि अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में अंतर देखने को मिल रहा है, लेकिन इतना स्पष्ट है कि यह नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में हाल के वर्षों की गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के कारण आने वाले घंटों में बचाव अभियान और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
नोट: लापता और मृतकों के आंकड़े राहत-बचाव अभियान के दौरान लगातार अपडेट हो रहे हैं। इसलिए पाठकों को नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
Writter:Newsgali


