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बलिया में सरयू नदी का कहर, 24 घंटे में तीन मकान नदी में समाए

बलिया में सरयू नदी का कहर, 24 घंटे में तीन मकान नदी में समाए; कई घरों पर खतरा

*बलिया।* उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में सरयू नदी की कटान ने एक बार फिर नदी किनारे बसे ग्रामीण परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। बैरिया तहसील के सुरेमनपुर दियरांचल स्थित गोपालनगर टांड़ी गांव में नदी की कटान से पिछले 24 घंटे के भीतर तीन मकान पूरी तरह नदी में समा गए। इसके अलावा दो अन्य मकानों के हिस्से भी कटकर नदी में विलीन हो गए हैं। लगातार हो रहे नुकसान से ग्रामीणों के सामने अपने घर और जमीन बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

सरयू नदी की कटान से तीन परिवारों के घर तबाह

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सरयू नदी का जलस्तर घटने के साथ गोपालनगर टांड़ी में कटान की रफ्तार तेज हो गई है। नदी की तेज धारा ने देखते ही देखते कई रिहायशी मकानों को अपनी चपेट में ले लिया।

इस घटना में मुसाफिर यादव, विजय सिंह और हंसराज यादव के मकान पूरी तरह नदी में समा गए। वहीं, संतोष यादव और भुटेली यादव के मकानों का आधा हिस्सा कटकर बह गया। इन दोनों मकानों के शेष हिस्से भी नदी किनारे खतरनाक स्थिति में बताए गए हैं।

घरों के नदी में समाने से प्रभावित परिवारों के सामने रहने और अपने जरूरी सामान को सुरक्षित रखने की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों को आशंका है कि अगर कटान इसी तरह जारी रही, तो आसपास के दूसरे मकान भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

हनुमान मंदिर का भी आधा हिस्सा नदी में समाया

सरयू नदी की कटान का असर केवल रिहायशी मकानों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, गोपालनगर टांड़ी गांव स्थित हनुमान मंदिर का भी आधा हिस्सा नदी में समा गया है।

धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। गांव के लोगों के लिए यह स्थिति गंभीर है, क्योंकि नदी की धारा लगातार आबादी के करीब पहुंच रही है। ऐसे में मकानों के साथ-साथ गांव के दूसरे महत्वपूर्ण स्थानों पर भी खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों को डर है कि समय रहते बचाव के उपाय नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में और नुकसान हो सकता है।

जमीन के बाद अब रिहायशी इलाकों पर खतरा

गोपालनगर टांड़ी और आसपास के दियरांचल में सरयू नदी की कटान लंबे समय से ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। नदी के किनारे स्थित उपजाऊ खेतों का कटना किसानों की आजीविका पर असर डालता है। अब जब कटान रिहायशी इलाकों तक पहुंच रही है, तो लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

ग्रामीणों के लिए घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि उनकी वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी का परिणाम होते हैं। एक बार मकान नदी में समा जाने के बाद दोबारा घर बनाना आसान नहीं होता। खेती की जमीन और मकान दोनों को नुकसान पहुंचने पर परिवारों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो सकता है।

इसी वजह से नदी किनारे बसे लोगों की मांग है कि कटान की समस्या का समाधान केवल अस्थायी उपायों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों की सुरक्षा के लिए स्थायी योजना भी बनाई जाए।

ग्रामीणों ने प्रशासन और बाढ़ विभाग से लगाई गुहार

लगातार हो रहे नुकसान के बीच ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और बाढ़ विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले भी कटान की समस्या को लेकर संबंधित विभागों से गुहार लगाई है, लेकिन उन्हें अब तक प्रभावी बचाव कार्य नजर नहीं आया है। यह ग्रामीणों का दावा है; प्रशासन की ओर से इस मामले में ताजा आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं हुई है।

ग्रामीण चाहते हैं कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर कटान की स्थिति का निरीक्षण करें और प्रभावित परिवारों को राहत दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। उनका कहना है कि समय रहते काम शुरू नहीं हुआ तो नदी के पास स्थित दूसरे मकानों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

प्रभावित परिवारों के नुकसान का आकलन करके उचित सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी है, ताकि बेघर होने की स्थिति में उन्हें राहत मिल सके।

क्या कटान रोकने के लिए स्थायी समाधान निकलेगा?

गोपालनगर टांड़ी की घटना ने एक बार फिर नदी किनारे बसे गांवों की सुरक्षा का सवाल खड़ा कर दिया है। हर बार कटान तेज होने पर ग्रामीणों को अपने घर और खेत बचाने की चिंता सताने लगती है।

अब लोगों की निगाहें प्रशासन और बाढ़ विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वैज्ञानिक तरीके से कटानरोधी कार्य कराया जाए और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास तथा सहायता पर भी ध्यान दिया जाए।

फिलहाल, गोपालनगर टांड़ी में तीन मकानों के नदी में समाने और दो अन्य मकानों के क्षतिग्रस्त होने की खबर ने स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रभावित क्षेत्र में बचाव कार्य कब शुरू होता है और परिवारों को किस तरह की सहायता मिलती है।

writter: Newsgali 

 

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