कुलधरा गाँव का रहस्य: 200 साल से वीरान भारत का सबसे भूतिया गाँव | (भाग 1)
2013 रात के लगभग 2 बज रहे थे;एक पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटरअपनी टीम के साथ रेगिस्तान के बीच स्थित एक सुनसान गाँव में पहुँचा।जब वे जाँच पूरी करने के बाद अपनी कार की ओर लौट ही रहे थे कि तो उन्होंने अपनी कार के बोनट पर कुछ अजीब सा दृश्य देखा। कार के बोनट पर एक छोटे बच्चे के हाथों के निशान देखने को मिला।
सबसे अजीब बात यह थी कि वहाँ कोई भी बच्चा नहीं था। वास्तव में बात ये थी कि,पूरे गाँव में कोई इंसान ही नहीं रहता था। लगभग 200 सालो से इस गाँव में कोई मानव रहा ही नहीं ।
जब टीम ने आसपास देखना शुरू किया, तो उनको एक के बाद एक कई रहस्यमयी संकेत दिखाई देने लगे। पत्रकारों को बुलाने पर उनकी गाड़ियों पर भी कुछ ऐसे ही निशान दिखाई दिए।
यह कोई हॉरर फिल्म की कहानी नहीं है। बल्कि यह राजस्थान के थार मरुस्थल में, जैसलमेर से लगभग 17 किलोमीटर दूर स्थित कुलधरा गाँव की कहानी है, जिसे भारत का सबसे भूतिया गाँव कहा जाता है।
कुलधरा गाँव में 400 से अधिक मकान हैं। यहाँ गलियाँ, मंदिर, कुएँ, दीवारें और दरवाजे सब कुछ मौजूद हैं, लेकिन; बस कोई इंसान नहीं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि यहाँ रात में चीखने की आवाज़ें सुनाई देती हैं। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि उन्होंने बिना सिर वाले लोगों की परछाइयाँ भी देखी हैं। कुछ लोगों ने तो ये भी दावा किया की इस वीरान इलाके में भी भोजन की खुशबू महसूस होती है।
दिन के समय में पर्यटक इन खंडहरों को देखने आते हैं, लेकिन शाम होने से पहले लौट जाते हैं क्योंकि माना जाता है कि रात में यहाँ रुकना मना है।
बताया जाता है कि लगभग 200 वर्ष पहले कुलधरा एक खुशहालऔर समृद्ध गाँव था। फिर एक दिन अचानक गाँव के सभी लोग गायब हो गए। बिना किसी शोर के, बिना कोई निशान छोड़े, मानो रातों-रात हजारों लोग हवा में विलीन हो गए हों। इस घटना के बारे में किसी को कुछ नहीं पता चला।
सलिम सिंह- इस रहस्य को समझने के लिए हमें सलिम सिंह के बारे में जानना होगा। तभी इस पूरी घटना को समझ पाएंगे।
वर्ष 1800 के शुरुआती सालोमें जैसलमेर एक रियासत थी। राजशाही सत्ता था, लेकिन असल में सारी शक्ति दीवान (प्रधानमंत्री) के हाथों में थी। उस समय सलिम सिंह जैसलमेर का दीवान था।
सलिम सिंह को निर्दयी और अत्यंत क्रूर माना जाता था। हालांकि सलिम सिंह हमेशा ऐसा नहीं था। सलिम सिंह के पिता स्वरूप सिंह भी जैसलमेर के दीवान थे, लेकिन शाही अधिकारियों ने धोखे से सलिम सिंह के पिता की हत्या कर दी। सलिम सिंह उस समय मात्र 11 वर्ष का था। पिता की हत्या को अपनी आँखों से देखने के बाद सलिम सिंह के मन में प्रतिशोध और क्रूरता भर गई।
कुछ सालो के बाद जब सलिम सिंह दीवान बना, तो उसने अत्याचार की सारी सीमाएँ पार कर दीं। जो भी सलिम सिंह की बात नहीं मानता, उसे कठोर दंड दिया जाता। दावा ये भी किया जाता है कि उसने अपने शासनकाल में इतने लोगों को हत्या करवाए जितने बाहरी दुश्मन भी नहीं मार पाए थे।
सलिम सिंह की कर-वसूली की नीतियाँ इतनी कठोर थीं कि किसानों और व्यापारियों का जीवन अत्यंत ही कठिन हो गया था। कहा जाता है किअत्यधिक कर और जबरन वसूली के कारण सलिम सिंह ने उस समय लगभग 2 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा कर ली थी, उस युग में ये सबसे बहुत बड़ी धन राशि थी।
भाग 2 में जानेंगे :
कुलधरा की स्थापना, पालीवाल ब्राह्मणों की अद्भुत जल-संरक्षण तकनीक, और वह घटना जिसने पूरे गाँव को हमेशा के लिए उजाड़ दिया।
कुलधरा गाँव का रहस्य: पालीवाल ब्राह्मण और कुलधरा की समृद्ध सभ्यता की अनकही कहानी
