News Gali

Cockroach Janta Party क्या है? जानिए CJP विवाद और वायरल आंदोलन की पूरी कहानी

दिनांक 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान  मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने एक ऐसा बयान दिया, CJI जस्टिस सूर्यकांत के उस बयान ने पुरे देशवासिओ  को चौका दिया। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा हमारे समाज में पहले से “परजीवी” मौजूद हैं, और कुछ बेरोजगार Unemployed) युवा “कॉकरोच” जैसे बन गए हैं।जस्टिस सूर्यकांत के अनुसार इन युवाओं को नौकरी नहीं मिलता,पेशों में जगह नहीं, इसलिए कुछ युवा लोग मीडिया, Social Media, RTI एक्टिविस्ट या दूसरे एक्टिविस्ट बनकर सरकार हमला करने लगते हैं।

CJI जस्टिस सूर्यकांत का यह बयान ऐसे वक्त पर आया जब पुरे देश में NEET एग्जाम पेपर लीक, मॅहगाई, बेरोजग़ारी तथा अन्य काम काज को लेकर पहले से ही लोगो के अंदर गुस्सा था। दूसरे दिन CJI जस्टिस सूर्यकांत ने सफाई दी की उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि फर्जी डिग्री लेकर सिस्टम में घुसने वाले लोगों की ओर था ना की भारतीय युवाओं की ओर। जस्टिस सूर्यकांत ने नौजवानो को इस विकसित भारत का स्तंभ बताया। लेकिन जस्टिस सूर्यकांत के सफाई आने से पहले ये मामला काफी बढ़ चूका था।

दिनाँक 16 मई को एक 30 वर्षीय भारतीय छात्र अभिजीत दीपके जो अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी का छात्र है। अभिजीत दीपके ने ट्वीट किया “क्या होगा अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?”

ये  ट्वीट आने बाद से आग की तरह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और उसी दिन अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर “Cockroach Janta Party” यानी CJP नाम से एक पेज बनाया। यह पार्टी कोई आधिकारिक राजनीतिक पार्टी नहीं थी, बल्कि एक मजाक और इंटरनेट ट्रेंड की तरह शुरू हुई थी।

इस पार्टी की सदस्यता लेने के लिए केवल तीन सवाल बस पूछे जाते थे: वो सवाल है ;

अगर इन तीनों का जवाब “हाँ” था, तो ना धर्म, ना  जाति या लिंग कोई मायने नहीं रखता था।

शुरुआत में जब Cockroach Janta Party शुरू हुआ तो बहुत से लोगो को बीएस एक मजाक की तरह लगा बल्कि देखा जाए तो बहुत से लोगो को तो पता तक नहीं था ,लेकिन कुछ ही दिनों में जबरदस्त तूफान Social Media पर देखने को मिला “Cockroach Janta Party” की  लोकप्रियता इतनी तेज़ी से बढ़ी की दो दिन के ट्वीटर पर 40 हज़ार फॉलोअर्स और चार दिनों में इंस्टाग्राम पर 80 लाख फॉलोअर्स हो गए। यह सबके लिए आश्चर्य जनक जैसा था बाद के कुछ ही दिन में फॉलोअर्स की संख्या 2.2 करोड़ तक पहुंच गई।

अब लोगो इस “Cockroach Janta Party” को सीरियस लेना शुरू किया क्यों की युवाओ की नाराजगी और निराशा को “Cockroach Janta Party” ने एक आवाज दी। पेपर लीक, महंगाई ,बेरोजगारी , और सरकार की युवाओं को अनदेखी से खुद को ही इस “कॉकरोच” वाली पहचान से युवाओ ने जोड़ लिया।

“Cockroach Janta Party” ने अपना एक मेनिफेस्टो भी जारी की, जिसमें कई गंभीर मांगें शामिल थीं:

Cockroach Janta Party के इन मांगों का सीधा मतलब, चुनाव आयोग की निष्पक्षता,न्यायपालिका की स्वतंत्रता,राजनीतिक भ्रष्टाचार और मीडिया की विश्वसनीयता जैसे मुद्दे छिपे हुए  थे।

जब “Cockroach Janta Party” ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग NEET पेपर लीक मामले के लिए उठाई और जैसे की वीडियो सोशल मीडिया पर आयी एक घंटे में करोड़ों व्यूज़ मिले, इसके बाद से तो सरकार और सत्ता पक्ष में हलचल बढ़ गई।

दिनाँक 21 मई को “CJP” का ऑफिशल ट्विटर अकाउंट को भारत में ब्लॉक कर दिया गया। इसके इसके पीछे वजह बताई गई की “Cockroach Janta Party” राष्ट्रीय सुरक्षा के दृश्टिकोण से खतरे की तरह है। इसके बाद एक दूसरा बैकअप अकाउंट बना,लेकिन बात यहाँ नहीं रुकी Cockroach Janta Party की  इंस्टाग्राम और वेबसाइट को भी निशाना बनाया गया। साथ ही अभिजीत दीपके ने दावा किया कि उन्हें और उनके परिवार को निशान बनाया जा रहा है, जान से मारने की धमकी तक दी गईं।

इसके बाद कुछ लोगों ने आम आदमी पार्टी  के साथ अभिजीत के पुराने कनेक्शन  दिखा कर और इसे साजिश बताने की कोशिश की। इस पर अभिजीत दीपके ने खुलकर साफ शब्दों में कहा कि हाँ ; वे सन 2020 से सन 2023 तक आम आदमी पार्टी के साथ काम कर चुके हैं और यह बात पहले से सभी को है।

इसके बाद की था सोशल मीडिया पर तरह-तरह की साजिश वाली बातें फैलने लगीं उदहारण के तौर पर की इस Cockroach Janta Party के अधिकतर पाकिस्तान से हैं यह विदेशी ताकतों द्वारा चलाई जा रही मुहिम है। हालांकि ऐसी खबरों का खंडन करते हुए अभिजीत ने स्क्रीन रिकॉर्डिंग दिखाकर कहा कि 94% से ज्यादा फॉलोअर्स भारत से हैं।

वीडियो में दावा किया गया कि देश में लोकतंत्र की स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि एक मजाक के तौर पर बने सोशल मीडिया पेज को भी खतरे की तरह देखा जा रहा है। विपक्षी दलों, एक्टिविस्टों और सरकार की आलोचना करने वालों पर दबाव बनाया जा रहा है।

उसके अंत में वक्ता कहता है कि सरकार की ये कार्रवाइयाँ उसकी ताकत नहीं बल्कि उनकी डर को दिखाती हैं। अगर करोड़ों लोग एक साथ आवाज उठाएं, तो किसी भी तरह की दबाव को चुनौती दी जा सकती है।

इस लेख का सार यह है की इंटरनेट मजाक नहीं रहा सिर्फ बल्कि युवाओं की नाराजगी और सिस्टम के खिलाफ असंतोष का प्रतीक बन गया।

Exit mobile version