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बलिया: भारत का 100वां रामसर स्थल बना सुरहा ताल

भारत का 100वां रामसर स्थल बना सुरहा ताल

भारत का 100वां रामसर स्थल

बलिया। विश्व पर्यावरण दिवस बलिया के लिए गर्व का अवसर रहा। बलिया जिले के जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) को भारत के 100वें रामसर स्थल (Ramsar Site) का मान्यता दे दिया गया। यह रामसर स्थल की उपलब्धि न केवल बलिया के लिए बल्कि पुरे उत्तर प्रदेश और देश के  लिए भी गर्व बन गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि पर ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा की जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) जैव विविधता से समृद्ध आर्द्रभूमि है, जहां पर बड़ी संख्या में स्थानीय और प्रवासी पक्षी आते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह उपलब्धि भारत की आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दिखती  है।


क्या है सुरहा ताल का इतिहास?

आज जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार के नाम से जाने जाना वाला रामसर स्थल,पहले सुरहा ताल के नाम से जाना जाता था। प्राकृतिक धरोहरों में जिले की सबसे महत्वपूर्ण धरोहर में से एक हैं। सुरहा ताल लगभग 34 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई  एक प्राकृतिक झील है, जो गंगा नदी के बदलते प्रवाह से बनी ऑक्सबो (Oxbow) झील मानी जाती है। सुरहा ताल जिले से लगभग 17 किलोमीटर दूर स्थित है।

सदियों से स्थानीय लोगों के लिए सुरहा ताल उनकी आजीविका का साधन रहा है। यहां पर रह रहे हजारों परिवार कृषि ,मछली पालन और अन्य जल आधारित गतिविधियों पर जीवन निर्भर हैं।


1991 में मिला पक्षी विहार का दर्जा

जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) की प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या और जैव विविधता को देखते हुए, साल 1991 में सुरहा ताल पक्षी विहार घोषित कर दिया गया था। 10 दिसंबर 2002 को इसका नाम बदलकर लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सम्मान में ‘जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार’ रखा गया।

हर साल सर्दियों के मौसम आते ही यहाँ पर साइबेरिया, मध्य एशिया और अन्य देशों से हजारों प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं। इन पक्षियों में कॉमन टील,बार- हेडेड गूज , पिनटेल , सारस और अनेक दुर्लभ पक्षी प्रजातियां यहाँ पर अपना अस्थायी आवास बनाती हैं।


रामसर स्थल बनने से क्या होगा फायदा?

जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) को अंतरराष्ट्रीय महत्व का दर्जा मिलने से उसके संरक्षण, शोध, पर्यटन के साथ जिले के नए अवसर खुल जाएगा।

विशेषज्ञों की माने तो  इस मान्यता से जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार (सुरहा ताल) को वैश्विक पहचान से तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय  रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।


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