बलिया में बाढ़ का पानी घटते ही स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता, 1,972 मरीजों का इलाज
बलिया। जिले में बाढ़ का पानी कम होने के बाद अब स्वास्थ्य को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। रविवार को जिले के 81 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और बाढ़ राहत केंद्रों पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन किया गया। इस दौरान वायरल संक्रमण, तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में परेशानी, पेट दर्द और त्वचा संबंधी समस्याओं से परेशान बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मेले में कुल 1,972 मरीजों का उपचार किया गया।
बाढ़ का पानी घटने के बाद स्वास्थ्य पर नजर
बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी कम होने के बाद भी लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। मौसम में बदलाव और आसपास की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग लोगों को साफ-सफाई रखने तथा मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक कर रहा है।
रविवार को आयोजित स्वास्थ्य मेले में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीजों की जांच की। बीमारी के अनुसार मरीजों को आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दी गई और जरूरत के मुताबिक निशुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
81 स्वास्थ्य केंद्रों पर लगा मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला
जिले के 81 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और बाढ़ राहत केंद्रों पर आयोजित स्वास्थ्य मेले में अलग-अलग तरह की स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीज पहुंचे। वायरल संक्रमण और तेज बुखार के साथ खांसी, गले में खराश, सांस लेने में परेशानी, पेट दर्द और त्वचा संबंधी शिकायतें भी सामने आईं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुल 1,972 मरीजों का इलाज किया गया। चिकित्सकों ने मरीजों की जांच के बाद उन्हें बीमारी के अनुसार दवा और जरूरी सावधानियों की जानकारी दी।
इन स्वास्थ्य केंद्रों पर भी पहुंचे मरीज
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चिलकहर स्वास्थ्य केंद्र पर 60 मरीजों का उपचार किया गया। वहीं संवरा में 43, बच्छईपुर में 80, कुरेजी में 18, ऊंचेड़ा में 22 और नगपुरा में 18 मरीजों का इलाज किया गया।
इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुरली छपरा में 49 मरीजों की जांच की गई। न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बहुआरा में 16, न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टोला शिवन राय में 19 और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कर्ण छपरा में 16 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
मच्छरजनित बीमारियों से बचाव की सलाह
मेले के नोडल एसीएमओ डॉ. योगेंद्र दास ने लोगों को बदलते मौसम और मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने साफ-सफाई पर ध्यान देने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की अपील की।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी कम होने के बाद भी आसपास की स्वच्छता पर ध्यान देना जरूरी है। लोगों को अपने घर और आसपास साफ रखने, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने तथा स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर
बाढ़ के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के लिए स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और बाढ़ राहत केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण हो जाती है।
रविवार को आयोजित स्वास्थ्य मेले के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों की जांच और उपचार किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जरूरत के मुताबिक मरीजों को दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
पानी उतरने के बाद भी सावधानी जरूरी
बाढ़ का पानी कम होना प्रभावित लोगों के लिए राहत की बात है, लेकिन इसके बाद भी स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। बदलते मौसम, मच्छरों और आसपास की स्वच्छता को लेकर सावधानी रखना जरूरी है।
बलिया में रविवार को आयोजित मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में 1,972 मरीजों का उपचार किया जाना बताता है कि बाढ़ और मौसम की स्थिति के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को साफ-सफाई रखने और किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराने की सलाह दी गई है।
Writter: News Gali


