आजमगढ़ में पूजा के दौरान खूनी वारदात, पत्नी और दो पंडितों की मौत; बेटे की भी गई जान, आरोपी की पुलिस मुठभेड़ में मौत
आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार, 22 सितंबर की शाम पूजा-पाठ के दौरान हुए विवाद ने बेहद गंभीर रूप ले लिया। पुलिस के अनुसार, अरविंद सिंह नाम के व्यक्ति पर अपनी पत्नी और पूजा कराने आए दो पंडितों की हत्या करने का आरोप है। घटना के बाद आरोपी अपने बच्चों के साथ घर के अंदर एक कमरे में बंद हो गया। कई घंटे चले पुलिस ऑपरेशन के बाद आरोपी की पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें वह घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। इस पूरे घटनाक्रम में आरोपी के एक बेटे की भी जान चली गई।
पूजा के दौरान शुरू हुआ विवाद
जानकारी के मुताबिक, शंभूपुर गांव स्थित घर में धार्मिक अनुष्ठान कराया जा रहा था। परिवार और स्थानीय लोगों से सामने आई जानकारी में बताया गया कि घर में कई दिनों से पूजा-पाठ चल रहा था। इस अनुष्ठान को परिवार की ओर से धार्मिक और पारिवारिक कारणों से कराया जा रहा था।
मंगलवार शाम अरविंद सिंह के घर पहुंचने के बाद वहां मौजूद पंडितों से उसका विवाद हो गया। कुछ रिपोर्टों में विवाद की शुरुआत पंडितों से पहचान संबंधी दस्तावेज मांगने को लेकर बताई गई है। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और फायरिंग की घटना सामने आई।
पुलिस के मुताबिक, इस घटना में अरविंद की पत्नी बबिता सिंह और पूजा कराने आए दो पंडितों—महेंद्र पाठक तथा अखिलेश मिश्रा—की मौत हो गई। घटना के बाद घर में अफरा-तफरी मच गई और गांव में भी दहशत का माहौल बन गया।
बच्चों के साथ कमरे में बंद हुआ आरोपी
तीन लोगों की मौत के बाद आरोपी ने खुद को बच्चों के साथ घर के अंदर बंद कर लिया। सूचना मिलने के बाद पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और घर को घेर लिया गया। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कोई जल्दबाजी करने के बजाय आरोपी को समझाने और आत्मसमर्पण कराने की कोशिश की।
रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों ने कई घंटे तक आरोपी से बातचीत करने का प्रयास किया। परिजनों और अन्य लोगों के माध्यम से भी उसे बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए समझाने की कोशिश की गई। करीब सात घंटे तक यह ऑपरेशन जारी रहा।
बेटे की भी मौत
ऑपरेशन के दौरान आरोपी के एक बेटे के घायल होने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने बच्चे को बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं, आरोपी की दो बेटियों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। दोनों बच्चों को सुरक्षा और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़
लगातार समझाने के बावजूद जब आरोपी बाहर नहीं आया, तब पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के मुताबिक, घर के अंदर से फायरिंग की आवाज आने के बाद पुलिस टीम ने ऑपरेशन तेज किया। पुलिस का कहना है कि आरोपी की ओर से फायरिंग की गई, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई हुई।
इस कार्रवाई में अरविंद सिंह घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, पूरी कार्रवाई के दौरान बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया गया।
घटना की वजह की जांच जारी
घटना के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर अभी पुलिस जांच कर रही है। कुछ रिपोर्टों में परिवार की ओर से धार्मिक अनुष्ठान और कथित मानसिक परेशानी से जुड़ी बातें सामने आई हैं, जबकि अन्य रिपोर्टों में पूजा के दौरान पहचान संबंधी दस्तावेज को लेकर हुए विवाद का उल्लेख है। इसलिए घटना की पूरी वजह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
घटना के बाद शंभूपुर गांव में शोक और तनाव का माहौल है। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और पूरे मामले से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि विवाद किस परिस्थिति में शुरू हुआ और कुछ ही समय में वह इतनी गंभीर घटना में कैसे बदल गया।
फिलहाल इस मामले में पांच लोगों की मौत की पुष्टि विभिन्न रिपोर्टों में हुई है—आरोपी अरविंद सिंह, उसकी पत्नी, दो पंडित और उसका एक बेटा। पुलिस की जांच जारी है और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि की जा रही है।


