बलिया में बैरिया-आरा फोरलेन की तैयारी तेज, 37.76 हेक्टेयर जमीन का होगा अधिग्रहण
*बलिया/जयप्रकाशनगर* । उत्तर प्रदेश के बलिया जिले को बिहार के आरा से सीधे जोड़ने वाली प्रस्तावित बैरिया-आरा ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना को लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। बलिया जिले की सीमा में परियोजना के लिए करीब 37.76 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है। प्रशासन की ओर से भूमि संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
इस सड़क परियोजना को बलिया और बिहार के भोजपुर क्षेत्र के बीच आवागमन को बेहतर बनाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। प्रस्तावित फोरलेन के तैयार होने के बाद दोनों क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क को नया विकल्प मिलने की उम्मीद है।
बलिया के किन गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित?
प्रस्तावित परियोजना के उत्तर प्रदेश वाले हिस्से में बलिया जिले के मुरली छपरा विकासखंड के कुछ गांव भूमि अधिग्रहण के दायरे में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इब्राहिमाबाद उपरवार, कोडरहा उपरवार और रामपुर कोडरहा गांवों की करीब 37.76 हेक्टेयर जमीन परियोजना के लिए ली जानी है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में प्रशासन की ओर से संबंधित भूमि, गाटों और भू-स्वामियों का निर्धारण किया जाना है। इसके बाद सत्यापन और आगे की वैधानिक कार्रवाई पूरी की जाएगी।
एनएच-31 से गंगा घाट तक बनेगा फोरलेन
परियोजना के तहत मुरली छपरा क्षेत्र में एनएच-31 के आसपास शिवन टोला से प्रस्तावित मार्ग गंगा किनारे तक पहुंचने की योजना है। इसके बाद महुली गंगा घाट के पास पुल के माध्यम से यह मार्ग बिहार की ओर जाएगा। बलिया की सीमा से गंगा तक प्रस्तावित फोरलेन की लंबाई करीब 7.2 किलोमीटर बताई गई है।
आगे यह मार्ग बिहार के भोजपुर जिले में प्रवेश करेगा और वहां से राष्ट्रीय राजमार्ग-922 से जुड़ने की योजना है। इस तरह परियोजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करना है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में आई थी रुकावट
बलिया क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति के कारण भूमि से संबंधित कुछ कार्रवाई प्रभावित हुई थी। पानी कम होने के बाद अब संबंधित जमीन और भू-स्वामियों की पहचान तथा सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है।
भूमि अधिग्रहण किसी भी बड़ी सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण चरण होता है। इसमें जमीन के रिकॉर्ड की जांच, संबंधित भू-स्वामियों की पहचान, आपत्तियों और दावों की प्रक्रिया तथा मुआवजा निर्धारण जैसे चरण शामिल होते हैं।
परियोजना पर करीब 1564 करोड़ रुपये का अनुमान
बैरिया-आरा फोरलेन परियोजना के 27.062 किलोमीटर लंबे हिस्से के निर्माण के लिए एनएचएआई की ओर से करीब 1,564.19 करोड़ रुपये के अनुमानित मूल्य का टेंडर जारी किया गया है। प्रस्तावित मार्ग एनएच-31 क्षेत्र से शुरू होकर महुली गंगा घाट के रास्ते बिहार में एनएच-922 से जुड़ने की योजना है।
इस परियोजना का असर केवल सड़क परिवहन तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। बलिया और भोजपुर के बीच व्यापार, आवागमन और माल ढुलाई के लिए भी सीधा सड़क संपर्क महत्वपूर्ण हो सकता है।
बिहार में भी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया
बैरिया-आरा फोरलेन परियोजना केवल बलिया तक सीमित नहीं है। बिहार के भोजपुर जिले में भी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार को मिलाकर करीब 96 हेक्टेयर भूमि परियोजना के दायरे में बताई गई थी।
बिहार के हिस्से में आरा सदर और बड़हरा क्षेत्र के कई गांवों की जमीन परियोजना के लिए चिन्हित की गई है। वहां भी राजस्व अभिलेखों की जांच और भौतिक सत्यापन जैसी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
बलिया के लोगों को क्या होगा फायदा?
बैरिया-आरा फोरलेन के निर्माण से बलिया के पूर्वी हिस्से और बिहार के भोजपुर क्षेत्र के बीच आवागमन का एक नया सड़क मार्ग विकसित होगा। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।
हालांकि, परियोजना का वास्तविक लाभ निर्माण पूरा होने और सड़क के चालू होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल मुख्य फोकस भूमि अधिग्रहण और उससे जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा करने पर है।
बैरिया-आरा फोरलेन परियोजना में अब बलिया की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। 37.76 हेक्टेयर भूमि से जुड़ी कार्रवाई आगे बढ़ने के बाद परियोजना के निर्माण कार्य की दिशा में भी अगला चरण शुरू होने की उम्मीद है।
Writer: News Gali
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