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कैलाश पर्वत का रहस्य: क्या यहां सच में समय रुक जाता है? जानिए वैज्ञानिक सच

कैलाश पर्वत की खासियत

क्या यहां सच में समय रुक जाता है

रूस के डॉक्टर अर्न्स्ट मुलदाशेव अपनी एक टीम के साथ साल 1999 में तिब्बत पहुंचे। वे दुनिया के सबसे रहस्यमयी पहाड़ों में से एक कैलाश पर्वत की खोज के लिए आए हुए थे।

लगभग कई हफ्तों के बाद जब वो वापस लौटे अपने देश रूस तो उन्होंने कुछ ऐसी बातो को समने रखा और दवा किये जिससे पूरी दुनिया चौक सी गयी थी. मुलदाशेव ने कहा कि पिछले कुछ साल पहले चार साइबेरियाई पर्वतारोहियों ने कैलाश  फतह करने निकले थे कैलाश पर चढ़ने की कोशिश की थी लेकिन डेढ़ साल के भीतर ही वे चारों अचानक बूढ़े होकर मर गए।

उनकी टीम के एक मेम्बर ने दावा करते हुए कहा कि कैलाश पर्वत एक “टाइम मशीन” की तरह है, जहां समय एक अलग ही तरीके से चलती है जहा इंसानो की उम्र तेजी से बढ़ने लगती है।  बाद ने कई लोगो ने ये भी दावा किया की कैलाश पर्वत अगर आप चढ़ना शुरू करते है तो वहाँ बाल और नाखून नार्मल गति से बढ़ने के बजाय और भी अधिक तेजी से बढ़ने लगती है।

डॉ. मुलदाशेव ने बताया की कैलाश पर्वत अंदर से खोखला है और कैलाश पर्वत के भीतर गुफाएं मौजूद हैं। जिनमे प्राचीन रहस्यमयी सभ्यताओं के लोग समाधि में मौजूद हैं।किये गए ये दावे सोशल मीडिआ पर इतने वायरल हुए कि आप,आज भी इंटरनेट पर “माउंट कैलाश” सर्च करने पर आपको ऐसी कहानियां सबसे पहले दिखाई देती हैं।

लेकिन सवाल यह है कि इन दावों में कितनी सच्चाई है?

क्या सचमुच कैलाश पर्वत पर समय अलग अलग  तरह से व्यवहार करता है?

माउंट एवरेस्ट जैसे ऊंचे पहाड़ों पर हजारों लोग चढ़ चुके हैं,लेकिन कैलाश पर्वत आज तक अछूता है?

ये रहस्य आज तक कोई सुलझा नहीं पाया है,आइए, इस रहस्य को समझते हैं।


कैलाश पर्वत की खासियत

कैलाश पर्वत तिब्बत के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है और इसकी ऊंचाई लगभग 6,638 मीटर है। यह माउंट एवरेस्ट से लगभग 2,200 मीटर छोटा है, खास बात ये है की इसकी आकृति पिरामिड जैसी है। यहाँ इतनी ढलान है की इसके कई भागो पर बर्फ टिकता ही नहीं है।


धार्मिक महत्व

कैलाश पर्वत की सबसे खास बात ये है की इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी धार्मिक महत्ता है।हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म , चारों कैलाश पर्वतपवित्र मानते हैं।

  • हिंदू मान्यता के अनुसार कैलाश पर्वत, यहां भगवान शिव और माता पार्वती निवास करते हैं।
  • बौद्ध धर्म में कैलाश पर्वत, को चक्रसंवर देवता का ध्यान स्थल माना जाता है।
  • जैन धर्म में कैलाश पर्वत, को अष्टापद कहा जाता है, जहां प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव ने मोक्ष प्राप्त किया।
  • बौद्ध धर्म में कैलाश पर्वत, को वह केंद्र माना जाता है जहां स्वर्ग और पृथ्वी मिलते हैं।

लगभग हजारों वर्षों से लोग कैलाश की परिक्रमा करते आ रहे हैं, यह परिक्रमा लगभग 52 किलोमीटर लंबी है। हिंदू और बौद्ध श्रद्धालु clockwise (घडी की दिशा में), जबकि जैन और बोन अनुयायी anti-clockwise (घडी की विपरीत दिशा में) परिक्रमा करते हैं।

मानसरोवर और राक्षस ताल का रहस्य

कैलाश पर्वत के पास ही दो प्रसिद्ध झीलें हैं, जिसके बारे में आपको भी पता होगा वो दो झीले।

  • मानसरोवर
  • राक्षस ताल

दोनों झीलें एक-दूसरे के बहुत ही नजदीक हैं,लेकिन मानसरोवर का पानी मीठा है जबकि राक्षस ताल का पानी खारा होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार राक्षस ताल का पानी खारा होने का कारण यह है कि राक्षस ताल एक बंद झील (Endorheic Lake) है,जहां से पानी बाहर नहीं निकल पाता तथा समय के साथ राक्षस ताल में नमक और खनिज जमा होते गए और जिसकी वजह से पानी खारा बन गया।


कैलाश पर्वत की सबसे रहस्यमयी  “टाइम डाइलेशन”

अब बात करते हैं कैलाश पर्वत की सबसे रहस्यमयी  “टाइम डाइलेशन” के बारे में।

अभी तक बहुत सारे लोगो ने दावा किया कि कैलाश पर्वत पर समय कुछ अलग तरीके से चलता है, पर वैज्ञानिको के दृष्टिकोण से इसका कोई प्रमाण नहीं है।

‘Time Dilation depends mainly on velocity and gravity according to Einstein’s Relativity’

आइंस्टीन की रिलेटिविटी थीवोरी के अनुसार समय केवल दो चीजों से प्रभावित होता है — गति और गुरुत्वाकर्षण। कैलाश पर्वत पर न ही ऐसा गुरुत्वाकर्षण और न तो असामान्य गति है जो समय को बदल सके।

वैज्ञानिको बाल और नाखून तेजी से बढ़ने वाले दावों का भी कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला। अधिकतर कहानियां केवल डॉ. मुलदाशेव के किये दावों पर आधारित हैं,जिन्हें किसी भी वैज्ञानिक जर्नल में स्वीकार नहीं किया गया।


कैलाश पर्वत पर कोई क्यों नहीं चढ़ता?

कैलाश पर अभी तक कोई क्यों नहीं चढ़ा इसका असल वजह इसकी धार्मिक पवित्रता है। जिसकी वजह से कोई भी इस पर अभी तक नहीं चढ़ा।

बात है 1985 की जब मशहूर पर्वतारोही Reinhold Messner को चीनी सरकार ने कैलाश पर चढ़ने का प्रस्ताव पेश किया था। लेकिन Reinhold Messner ने इसे अस्वीकार कर दिया। Reinhold Messner के कहा कि ऐसे पवित्र पर्वत पर चढ़ना लोगों की आस्था का अपमान होगा।

वर्ष 2001 के बाद से कैलाश पर्वत पर चढ़ाई कानूनी रूप से भी प्रतिबंधित है।

इसका इसका मतलब यह नहीं कि कैलाश पर्वत एक सामान्य पर्वत जैसा है। दुनिया में कैलाश पर्वत जैसा शायद ही कोई दूसरा ऐसा स्थान हो, जिसे चार अलग-अलग धर्म के लोग समान श्रद्धा से पूजते हों।

कैलाश पर्वत हमें यह सिखाता है कि हर चीज जीतने के लिए नहीं होती — कुछ चीजें केवल सम्मान देने के लिए होती हैं।


 

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