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सहतवार महायज्ञ पर सियासी संग्राम: धर्म और राजनीति को लेकर भाजपा-सपा में जुबानी जंग

सहतवार महायज्ञ बना सियासी बहस का केंद्र, धर्म और राजनीति पर आमने-सामने आए नेता

सहतवार, बलिया |

सहतवार में आयोजित भव्य महायज्ञ जहां हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना, वहीं कार्यक्रम के बाद दिए गए कुछ राजनीतिक बयानों ने जिले की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। धर्म और राजनीति के रिश्ते को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

भाजपा नेता अजय सिंह ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता नीरज सिंह गुड्डू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धार्मिक आयोजनों को राजनीति का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महायज्ञ जैसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने और आध्यात्मिक वातावरण बनाने के लिए होते हैं, लेकिन जब इनमें राजनीतिक संदेश हावी होने लगते हैं तो मूल उद्देश्य प्रभावित होता है।

अजय सिंह ने कहा कि महायज्ञ में सभी दलों के लोग शामिल हुए थे और आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। लेकिन बाद में दिए गए कुछ बयानों से ऐसा प्रतीत हुआ कि धार्मिक मंच को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का कोई सामान्य कार्यकर्ता किसी को प्रमाणपत्र देने की स्थिति में नहीं है, लेकिन धर्म की आड़ में राजनीति करना उचित नहीं माना जा सकता।

वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता नीरज सिंह गुड्डू ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि समाजवाद किसी एक जाति, वर्ग या धर्म तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि वे वर्षों से धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में भाग लेते रहे हैं और सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। उनके अनुसार धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होना राजनीति नहीं, बल्कि समाज सेवा और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ाव का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि “मैं अपने धर्म का पालन करता हूं, लेकिन साथ ही सभी धर्मों का सम्मान भी करता हूं। समाजवाद का अर्थ ही है हर वर्ग और हर व्यक्ति को साथ लेकर चलना।”

जनता क्या सोचती है?

स्थानीय लोगों का मानना है कि महायज्ञ जैसे धार्मिक आयोजन सामाजिक एकता और श्रद्धा के प्रतीक होते हैं। ऐसे आयोजनों को राजनीतिक विवादों से दूर रखना चाहिए ताकि उनकी पवित्रता और उद्देश्य बरकरार रहे।

राजनीतिक महत्व

सहतवार की राजनीति हमेशा से वैचारिक बहसों और जनभागीदारी के लिए जानी जाती रही है। ऐसे में सहतवार महायज्ञ को लेकर शुरू हुई यह बयानबाजी आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति का अहम मुद्दा बन सकती है। हालांकि आम लोगों की प्राथमिकता यही है कि धार्मिक आयोजन समाज में सद्भाव और भाईचारे का संदेश देते रहें।

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