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भानगढ़ किला: क्या सचमुच भूतिया है भारत का सबसे रहस्यमयी किला? जानिए इतिहास, श्राप की कहानियां और वैज्ञानिक सच्चाई

क्या सचमुच भूतिया है भारत का सबसे रहस्यमयी किला?

राजस्थान: भानगढ़ किला, भारत की सबसे रहस्यमयी और कथित रूप से “भूतिया” स्थानों में गिना जाता है यह राजस्थान की अरावली पहाड़ियों में स्थित, ऐसा किला जिसके मुख्य द्वार पर एक चेतावनी लिखी है कि सूर्यास्त के बाद किले में प्रवेश करना मना है। मुख्य द्वार पर लगा बोर्ड किसी ग्रामीण या सुरक्षा गार्ड ने नहीं लगाया बल्कि (ASI) भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने ने लगाई है।

कहा जाता है की एक बार तीन दोस्त एक दूसरे से शर्त लगते है की कौन किले में रात को रुक पाएगा फिर क्या था  एकदिन तीनो दोस्तो ने चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए देर रात किले में प्रवेश किया, किले में अँधेरा बहुत था अंधेरा इतना घना था कि उनकी  टॉर्च की लाइट भी ज्यादा दूर तक नहीं पहुंच पा रही थी। तभी उनमे से एक सूखे पुराने कुँए में गिर जाता है और उसे गंभीर चोटे आती है, बाकि के दोस्तों ने उसे कुएँ से निकला और गाड़ी से अस्पताल की ओर निकले, फिर क्या था; रास्ते में उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है और तीनों की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद लोगो इसे किले के श्राप का परिणाम मानते हैं।


भानगढ़ का इतिहास

आमेर के राजा भगवंत दास ने भानगढ़ की स्थापना सन  1573 में अपने छोटे पुत्र माधो सिंह के लिए करवाई थी। माधो सिंह,मान सिंह के छोटे भाई थे जो मुगल सम्राट अकबर के प्रसिद्ध सेनापति थे। अपने  समय में भानगढ़ एक समृद्ध नगर था, जहाँ लगभग  विशाल महल, मंदिर, बाजार और 9,000 से ज्यादा घर थे। लेकिन आज भानगढ़ किला का पूरा क्षेत्र खंडहर में बदल चुका है।और  एक खास बात यह है कि किले के अंदर किसी भी घर की छत नहीं है। दीवारें आज भी वैसे ही खड़ी हैं। लोगों का दावा है कि कई बार छत बनाने की कोशिश की गयी पर जो भी यहां छत बनाने की कोशिश करता है, वह गिर जाती है।


बा बालूनाथ का श्राप बा

एक कहानी बाबा बालूनाथ का भी सुनने को मिलता है जिसमे बताया जाता है की,भानगढ़ में एक बालूनाथ नाम के साधु रहते थे जब माधो सिंह ने भानगढ़ में किला बनाने का निर्णय लिया,तो उस वक्त बाबा बालूनाथ इसी स्थान पर तपस्या कर रहे थे।

बाबा बालूनाथ किले के निर्माण की अनुमति, एक शर्त पर दी कि भानगढ़ किले की परछाई कभी उनके आश्रम पर नहीं पड़नी चाहिए;और यही ऐसा नही हुआ तो, पूरा नगर भस्म हो जाएगा।

शुरु में भानगढ़ का किला केवल चार मंजिला बनाया गया था, ताकि किला की छाया आश्रम तक न पहुंचे।शुरुआत में सबकुछ सही था पर कुछ दिनों के बाद अजब सिंह;माधो सिंह के पोते ने सात मंजिला किले को कर दिया,इसके बाद क्या था किले की परछाई बाबा बालूनाथ के आश्रम तक पहुंच गई और दिए गए श्राप की  वजह से पूरा भानगढ़ किला तबाह हो गया।


राजकुमारी रत्नावती और तांत्रिक सिंघिया की कहानी

राजकुमारी रत्नावती और तांत्रिक सिंघिया की कहानी दूसरी और सबसे प्रसिद्ध है। कहा जाता है की रत्नावती अपनी सुंदरता के लिए पूरे राज्य में प्रसिद्ध थीं। सिंघिया नामक एक तांत्रिक उनसे प्रेम करता था और उन्हें पाने के लिए काला जादू करने लगा।

एक दिन की बात है जब राजकुमारी रत्नावती बाजार इत्र खरीदने गईं। फिर क्या था तांत्रिक ने उसके इत्र की शीशी पर जादू कर दिया ताकि उसे लगाने के बाद राजकुमारी रत्नावती उसके वश में हो जाएं। लेकिन उसके विछाए जाल को पहले ही राजकुमारी रत्नावती समझ गईं और उस इत्र की शीशी एक बड़े पत्थर पर फेंक मारा ।

उस फेके गए पत्थर पर जादू असर कर गया और वह पत्थर लुढ़कता हुआ तांत्रिक की ओर बढ़ा और उसे कुचलकर मार डाला।तांत्रिक ने मरने से पहले पूरे श्राप दिया कि इस पुरे नगर का नाश हो जाएगा और यहां के लोगो का कभी पुनर्जन्म ना हो।

अगले वर्ष अजबगढ़ और भानगढ़ के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिस युद्ध में राजकुमारी रत्नावती की मृत्यु हो गई और पूरे  नगर का विध्वंश हो गया।


क्या सचमुच भानगढ़ किला में भूत-प्रेत हैं?

आज के समय में इंटरनेट पर हजारों कहानियां भानगढ़ को लेकर मौजूद हैं। लोग तरह तरह के दावा करते हैं कि महिलाओं के रोने की आवाज आती है;उन्हें रात में अजीब आवाजें सुनाई देती हैं,और कभी-कभी इत्र की खुशबू भी महसूस होती है।

इतिहासकारों के अनुसार बताये तो  राजकुमारी रत्नावती, तांत्रिक सिंघिया और बाबा बालूनाथ के अस्तित्व का कोई भी प्रमाणित इतिहास रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। ये सारी कहानियां लोककथाओं का हिस्सा हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती आ रही हैं।


विज्ञान क्या कहता है?

वैज्ञानिकों के अनुसार भानगढ़ में महसूस होने वाले रहस्यमयी अनुभवों के पीछे कई प्राकृतिक कारण हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी इमारतों के बीच से गुजरने वाली हवा इंफ्रासाउंड (20 हर्ट्ज से कम आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगें) पैदा करती है। इंसान इन्हें सुन नहीं सकता, लेकिन शरीर इन्हें महसूस कर सकता है। इससे बेचैनी, डर और ऐसा महसूस हो सकता है कि कोई आसपास मौजूद है।

इसके अलावा मनोविज्ञान में “सजेस्टिबिलिटी” और “पैरेडोलिया” जैसी घटनाएं भी होती हैं, जिनमें व्यक्ति सामान्य छायाओं और आकृतियों में चेहरे या इंसानी आकृतियां देखने लगता है।


ASI और विशेषज्ञों की राय

सन 2012 में भारतीय पैरानॉर्मल सोसायटी के संस्थापक गौरव तिवारी अपनी टीम के साथ पूरी रात भानगढ़ किले में रहे। उन्होंने EMF मीटर, थर्मल कैमरा और अन्य उपकरणों की मदद से जांच की, लेकिन किसी भी प्रकार की अलौकिक गतिविधि का प्रमाण नहीं मिला।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भी स्पष्ट किया है कि भानगढ़ को भूतिया नहीं माना जाता। सूर्यास्त के बाद प्रवेश पर प्रतिबंध सुरक्षा कारणों से लगाया गया है।

किले के आसपास जंगली जानवर जैसे तेंदुए, लकड़बग्घे, सियार और अन्य वन्यजीव घूमते रहते हैं। इसके अलावा पुरानी और जर्जर इमारतों के गिरने का खतरा भी बना रहता है।


भानगढ़ के उजड़ने का वास्तविक कारण

इतिहासकारों के अनुसार भानगढ़ का पतन किसी श्राप या काले जादू के कारण नहीं हुआ था। समय के साथ राजनीतिक महत्व कम होने लगा और लोग अन्य क्षेत्रों में बसने लगे।

इसके बाद वर्ष 1783 में उत्तर भारत में पड़े भीषण अकाल ने स्थिति और खराब कर दी। पानी और भोजन की कमी के कारण लोगों ने शहर छोड़ दिया और धीरे-धीरे भानगढ़ खंडहर में बदल गया।


निष्कर्ष

भानगढ़ किले का रहस्य भूत-प्रेतों से ज्यादा इतिहास, लोककथाओं और मानव मनोविज्ञान से जुड़ा हुआ है। श्राप और तांत्रिक की कहानियां भले ही रोमांचक लगती हों, लेकिन उपलब्ध ऐतिहासिक और वैज्ञानिक प्रमाण इन्हें सत्य साबित नहीं करते। फिर भी भानगढ़ आज भी भारत के सबसे रहस्यमयी पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बनाए हुए ह

 

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