कुलधरा गाँव का रहस्य: सलिम सिंह, मुखिया की बेटी और 84 गाँवों के पलायन की कहानी (भाग ३ )
भाग २ में हमने जाना
- पालीवाल ब्राह्मण
- 84 गाँव
- खाडीन सिस्टम
- रेगिस्तान में खेती
- कुलधरा की समृद्धि के बारे में।
कुलधरा का श्राप
लोककथाओं केअनुसार,कुलधरा छोड़कर जब पालीवाल ब्राह्मण गए, तो उन्होंने पुरे गाँव को श्राप दिया कि भविष्य में कोई भी यहां पर बस नहीं पाएगा,और इन्ही श्रापो के कारण पिछले लगभग 200 सालो में यह गाँव फिर कभी आबाद नहीं हो पाया। स्थानीय लोगों का दावा है कि अगर अब तक जो कोई भी यहाँ बसने की कोशिश किया , उसे डरावनी और अजीब घटनाओं का सामना करना पड़ा। इसी वजह से कुलधरा को भारत के सबसे भूतिया स्थानों में गिना जाने लगा।
ऐसी कई सारी कहानियाँ प्रख्यात हैं कि जिनमे पूर्णिमा की रात यहाँ घुँघरुओं की आवाज़ें सुनाई देना, तथा बताया जाता है की मंदिरों की घंटिया बजने लगती हैं,लोगों की परछाइयाँ दिखाई देती हैं और ऐसा भी लगता है मानो गाँव फिर से जीवित हो उठा हो।
पैरानॉर्मल जाँच
गौरव तिवारी, भारत के इंडियन पैरानॉर्मल सोसायटी के संस्थापक और उनकी एक टीम कुलधरा में कई बार जाँच की।
उनके जाँच के दौरान उन्होंने बहुत सी असामान्य बातें दर्ज कीं: जैसे ;
- कई स्थान जहाँ पर तापमान अचानक बहुत कम हो जाता था।
- इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) में असामान्य बदलाव दर्ज किए गए।
- मोशन सेंसर कभी-कभी बिना किसी स्पष्ट कारण के सक्रिय (चालू ) हो जाते थे।
- कुछ टीम सदस्यों को ऐसा भी महसूस हुआ कि किसी ने उन्हें छुआ है।
- ऑडियो रिकॉर्डिंग में ऐसी आवाज़ें कैद हुईं जिनका स्रोत दिखाई नहीं देता था।
और सबसे जो चर्चित घटना वह था जिसका उल्लेख शुरुआत में हमने किया गया था,सुनसान स्थान पर खड़ी गाड़ियों पर अचानक छोटे बच्चों के हाथों के निशान दिखाई देना।
इन सभी घटनाओं के आधार पर कुछ लोगों ने यह निष्कर्ष निकाला कि कुलधरा में कोई अलौकिक शक्ति मौजूद हो सकती है।
इतिहास क्या कहता है?
हालाँकि इतिहासकारों और शोधकर्ताओं ने इन कहानियो को ले कर अलग विश्लेषण किया है।
ऐतिहासिक अभिलेखों से यह हमें पता चलता है कि:
- सलिम सिंह वास्तव में जैसलमेर का दीवान था।
- पालीवाल ब्राह्मण वास्तव में अस्तित्व में थे।
- उन पर अत्याचार और भारी कर लगाए गए थे।
लेकिन एक सबसे महत्वपूर्ण बात है;
गाँव के मुखिया की बेटी वाली कहानी, जिसका कोई भी ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिला। शाही आदेश या समकालीन पुस्तक यहां तक की किसी सरकारी दस्तावेज़ में भी इसका उल्लेख नहीं मिलता। इसलिए इतिहासकार इसे लोककथा मानते हैं।
क्या कोई भूकंप आया था?
साल 2017 में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में दावा किया गया कि कुलधरा और आसपास के गाँवों के खंडहरों का विश्लेषण करने पर ऐसा लगता है कि कुलधरा का विनाश किसी भूकंप का परिणाम हो सकता है।
लेकिन इस विश्लेषण के बाद में एक अन्य शोध-पत्र ने इस सिद्धांत को चुनौती दी।
उसमें बताया गया कि:
- 1825 के आसपास किसी भी प्रकार के बड़े भूकंप का रिकॉर्ड नहीं है।
- यदि भूकंप आया होता तो आसपास के अन्य गाँव भी प्रभावित होते वो क्यों नहीं प्रभावित हुए ।
- कुलधरा की बहुत सी दीवारें आज भी सही संरेखण में खड़ी हैं, जो बड़े विनाशकारी भूकंप की संभावना को कमजोर करती हैं।
इसलिए अधिकांश शोधकर्ताओं का यह मानना है कि गाँव छोड़ने का कारण केवल भूकंप नहीं था।
भाग 4 में जानेगे :
कुलधरा के उजड़ने का वास्तविक कारण, पानी का संकट, सलिम सिंह का अत्याचार, और वह ऐतिहासिक सच्चाई जो भूतों की कहानी से बिल्कुल अलग है।














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