बलिया जिला अस्पताल में कथित फर्जीवाड़ा, पूर्व CMO समेत डॉक्टरों पर मुकदमा
बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिला अस्पताल से जुड़ा कथित दस्तावेजी हेरफेर का मामला सामने आया है। उम्र प्रमाण पत्र में कथित बदलाव के आरोप में पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) समेत जिला अस्पताल के तीन डॉक्टरों और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ बलिया कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने न्यायालय के आदेश के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामला एक युवक की उम्र से संबंधित प्रमाण पत्र में कथित तौर पर बदलाव किए जाने के आरोप से जुड़ा है। शिकायतकर्ता 64 वर्षीय जय नाथ राम ने इस संबंध में न्यायालय में शिकायत दाखिल की थी। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
उम्र प्रमाण पत्र में कथित बदलाव का आरोप
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2019 में जय नाथ राम के बेटे के खिलाफ जानलेवा हमले के आरोप में मामला दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता का कहना है कि उस समय उनका बेटा नाबालिग था और उसकी उम्र से संबंधित दस्तावेज किशोर न्याय बोर्ड की कार्यवाही के आधार पर तैयार किए गए थे।
शिकायत में बताया गया है कि जिला अस्पताल की ओर से 17 जनवरी 2022 को संबंधित युवक का उम्र प्रमाण पत्र जारी किया गया था। इसमें उसकी उम्र 20 वर्ष निर्धारित किए जाने का दावा किया गया है।
बाद में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इसी प्रमाण पत्र में कथित तौर पर बदलाव किया गया और दस्तावेज में दर्ज उम्र को 20 वर्ष से बढ़ाकर 22 वर्ष कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने इस बदलाव में प्रभाव के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
पूर्व CMO समेत कई लोगों को बनाया गया आरोपी
शिकायत में पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट और दो अन्य डॉक्टरों के अलावा एक अन्य व्यक्ति को भी आरोपी बनाया गया है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उम्र प्रमाण पत्र में कथित बदलाव की प्रक्रिया में इन लोगों की भूमिका रही। पुलिस ने न्यायालय के आदेश और शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और कथित रूप से जाली दस्तावेज के इस्तेमाल से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
बलिया कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार सिंह ने मुकदमा दर्ज किए जाने की पुष्टि की है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शैलेश कुमार पांडेय के 19 अगस्त के आदेश के बाद की गई।
न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान उम्र प्रमाण पत्र के मूल रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच की जा सकती है।
दस्तावेजों की जांच के बाद साफ होगी स्थिति
इस मामले में पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल उम्र प्रमाण पत्र में कथित बदलाव को लेकर है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि प्रमाण पत्र में मूल रूप से क्या दर्ज था, उसमें बाद में कोई परिवर्तन किया गया या नहीं और यदि परिवर्तन हुआ तो वह किस स्तर पर हुआ।
इसके अलावा पुलिस संबंधित अस्पताल रिकॉर्ड, दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया और मामले से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर सकती है।
फिलहाल मामला जांच के चरण में है। पुलिस की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि उम्र प्रमाण पत्र में वास्तव में कोई हेरफेर हुआ था या नहीं और इसके लिए किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
नोट: इस मामले में लगाए गए आरोप शिकायत और दर्ज मुकदमे पर आधारित हैं। आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है।
writter:Newsgali


